Anima Sarma, member of NHRCCB, Nagaon welcomed all the children, teachers, and other guests. Our legal advisor Dr Sujata Bhattacharya, Principal of Law College, Nagaon spoke on CYBER CRIME and SECURITY in today's time. Dr. Jayashree Pathak, prominent dentist of Nagaon organised a session on PERSONAL HYGIENE and MENTAL HEALTH for school and college students. In today's world, where we want every child to be safe and healthy, sessions like this are very important. Punam Bagaria, member of NHRCCB, Nagaon delivered the vote of thanks, thanking all the guests for giving their valuable time and the students who listened to the session calmly and were attentive throughout the session. Special thanks was towards Ruba Phukan ma'am, Principal of the school, who provided the space for conducting the session in her school.
दिनांक: 02 जून, 2026 स्थान: गोलाघाट, असम , आज दिनांक 2 जून को राष्ट्रीय मानवाधिकार और अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) की असम प्रदेश टीम की तरफ से एक विशेष जागरूकता सभा का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 'अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण दिवस' (International Child Protection Day) के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें एक सुरक्षित माहौल प्रदान करना था। यह जागरूकता सभा गोलाघाट स्थित श्री सत्य साईं विद्या विहार स्कूल में आयोजित की गई, जिसमें कक्षा पांचवीं और छठी के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को 'बाल संरक्षण अधिनियम' (Child Protection Act) और 'गुड टच-बैड टच' (Good Touch and Bad Touch) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर संक्षिप्त और प्रभावी रूप से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ लुकुमोनी गोस्वामी (पूर्व अध्यक्षा, बाल कल्याण समिति, गोलाघाट जिला) ने बच्चों को बहुत ही सरल, सहज और सुलभ तरीके से इन संवेदनशील विषयों को समझाया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे किसी भी असहज परिस्थिति में चुप न रहें और अपने माता-पिता या शिक्षकों से खुलकर बात करें। श्री सत्य साईं विद्या विहार के प्रधानाचार्य श्री शुभाशीष राजखोवा जी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार और अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) द्वारा की गई इस अनूठी पहल की भूरि-भूरि सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को ऐसे विषयों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने ब्यूरो की पूरी टीम को अपनी शुभकामनाएं और बधाई संदेश भी दिया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि एवं पदाधिकारीगण: इस गरिमामयी कार्यक्रम में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो निम्नलिखित हैं: डॉ. लुकुमोनी गोस्वामी (पूर्व अध्यक्षा, बाल कल्याण समिति, गोलाघाट जिला) - मुख्य अतिथि / वक्ता डॉ. ज्योति भूइयां बोरा (पूर्व संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य विभाग, तिनसुकिया जिला) श्री शुभाशीष राजखोवा (प्रधानाचार्य, श्री सत्य साईं विद्या विहार) श्री संतोष कुमार कानू (राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, NHRCCB) श्री गुड्डू प्रसाद वर्मा (प्रदेश उपाध्यक्ष, NHRCCB) श्री मनीष कुमार गुप्ता (प्रदेश महासचिव, NHRCCB) श्री अंबरिश सरमा (मंडलीय उपाध्यक्ष) गायत्री बरुआ (जिला अध्यक्ष) ज्योतिका दुवरा (जिला महासचिव) प्रियम ज्योति दास (जिला मीडिया प्रभारी) भारती बरुआ (सक्रिय सदस्य) कार्यक्रम के अंत में ब्यूरो की टीम ने स्कूल प्रशासन, शिक्षकों और बच्चों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन और समन्वय स्थानीय टीम द्वारा बेहद सुचारू रूप से किया गया। धन्यवाद मनीष कुमार गुप्ता प्रदेश महासचिव
जामशेदपुर, झारखंड , 01 जून 2026 राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव श्री विनय चंद्रा द्वारा जनहित में उठाई गई शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने जमशेदपुर में उत्पन्न पेट्रोल एवं डीजल संकट का सफलतापूर्वक समाधान किया है। दिनांक 14 मई 2026 को जमशेदपुर के विभिन्न क्षेत्रों—साकची, बिष्टुपुर, कदमा, मानगो, गोलमुरी एवं सिदगोड़ा सहित कई इलाकों में पेट्रोल एवं डीजल की गंभीर कमी उत्पन्न हो गई थी। अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई थीं तथा कई स्थानों पर ईंधन की राशनिंग की जा रही थी। इस स्थिति से आम नागरिकों, दैनिक यात्रियों एवं आपातकालीन सेवाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। जनहित को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव श्री विनय चंद्रा ने भारत सरकार के लोक शिकायत पोर्टल (PG Portal) पर शिकायत संख्या GOVJH/E/2026/0003034 दर्ज कर जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। शिकायत में निम्न प्रमुख बिंदुओं को उठाया गया था— • शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी एवं "नो स्टॉक" की स्थिति। • 3 से 4 घंटे तक लंबी कतारों में खड़े रहने को विवश नागरिक। • दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों के लिए सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराना। • यातायात व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव एवं जाम की समस्या। • एम्बुलेंस एवं अन्य आपातकालीन सेवाओं के संचालन पर संभावित खतरा। • कालाबाजारी एवं जमाखोरी की आशंका। • सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रही अफवाहों के कारण जन-घबराहट। शिकायत प्राप्त होने के बाद उसी दिन उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम की अध्यक्षता में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, तेल कंपनियों, पेट्रोल पंप संचालकों एवं पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में तेल कंपनियों को निर्देशित किया गया कि वे आपूर्ति श्रृंखला की सतत निगरानी करें तथा आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराएं, ताकि कृत्रिम कमी की कोई स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही प्रशासन द्वारा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स एवं मीडिया प्रतिनिधियों से भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से बचने तथा जनता तक सही एवं तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने की अपील की गई। जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में जिले में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य एवं निर्बाध रूप से संचालित हो रही है तथा स्थिति पूर्णतः नियंत्रण में है। इस अवसर पर श्री विनय चंद्रा ने कहा— "लोकतंत्र में जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाना प्रत्येक जागरूक नागरिक एवं सामाजिक संगठन की जिम्मेदारी है। मुझे प्रसन्नता है कि जिला प्रशासन ने इस गंभीर विषय पर त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को सामान्य किया। मैं उपायुक्त महोदय, प्रशासनिक अधिकारियों, तेल कंपनियों एवं सभी संबंधित पक्षों का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया।" राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) भविष्य में भी जनहित, नागरिक अधिकारों एवं सार्वजनिक कल्याण से जुड़े मुद्दों को जिम्मेदारीपूर्वक उठाता रहेगा तथा प्रशासन एवं जनता के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देता रहेगा। जारीकर्ता: विनय चंद्रा राष्ट्रीय संयुक्त सचिव राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB)
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) द्वारा “युवा, नेतृत्व एवं मानवाधिकार : भारत के भविष्य में NHRCCB की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय ऑनलाइन वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने की। वेबिनार के मुख्य वक्ता एडवोकेट जितेंद्र पुरोहित (प्रदेश विधिक सलाहकार, मध्य प्रदेश) ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है। यदि उन्हें मानवाधिकार, संवैधानिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की सही दिशा मिले, तो वे समाज और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने मानवाधिकार जागरूकता, विधिक साक्षरता एवं जमीनी स्तर पर सामाजिक कार्यों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि एवं बिहार प्रदेश अध्यक्ष श्री शंभूनाथ झा ने कहा कि मानवाधिकार केवल अधिकारों की चर्चा नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक गतिविधियों, जन-जागरूकता अभियानों एवं मानव सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रणधीर कुमार ने कहा कि भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है। मानवाधिकार जागरूकता, नेतृत्व विकास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से ही एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने NHRCCB की विभिन्न गतिविधियों, कार्यप्रणाली एवं समाज में उसकी सकारात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला। वेबिनार में इस बात पर भी चर्चा हुई कि मानवाधिकार संरक्षण केवल सामाजिक न्याय ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास, सामाजिक स्थिरता, उत्पादकता एवं आर्थिक प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। जब समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं समान अवसर सुनिश्चित होते हैं, तो देश की विकास दर, सामाजिक समरसता एवं जनकल्याण को भी बल मिलता है। कार्यक्रम के दौरान युवाओं की भूमिका, स्थानीय स्तर पर मानवाधिकार गतिविधियों के संचालन, नेतृत्व विकास, सामाजिक जागरूकता, टीम निर्माण एवं NHRCCB के माध्यम से उपलब्ध अवसरों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि NHRCCB युवाओं को समाज सेवा, नेतृत्व विकास, जनसंपर्क एवं मानवाधिकार जागरूकता के क्षेत्र में कार्य करने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय समन्वयक प्रभात मिश्रा ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं देशभर से जुड़े पदाधिकारियों, सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए मानवाधिकार जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी, मानवाधिकार कार्यकर्ता, युवा साथी एवं सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। जारीकर्ता राष्ट्रीय कार्यालय राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB)
गुवाहाटी, 30 मई 2026: अंतर्राष्ट्रीय बाल संरक्षण दिवस के अवसर पर नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) की कामरूप महानगर जिला इकाई ने जागृति ट्रस्ट के सहयोग से दक्षिण बेलटोला एम.ई. स्कूल, कुंडिल नगर (बेलटोला कॉलेज के निकट), गुवाहाटी में एक व्यापक बाल सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को "गुड टच और बैड टच" के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग बनाना था। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय श्रीमती बबीता शर्मा 'जिला सचिव, NHRCCB कामरूप महानगर तथा उनकी समर्पित टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री संतोष कुमार कानू (राष्ट्रीय संयुक्त सचिव) एवं श्री मनीष कुमार गुप्ता (राज्य महासचिव) उपस्थित रहे। असम की गौरवशाली परंपरा के अनुसार अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान पारंपरिक असमिया गमछा (गामोसा) भेंट कर किया गया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से: • श्री देबो कुमार चेतिया – प्रधानाचार्य, दक्षिण बेलटोला एम.ई. स्कूल • प्रो. रोमन चंद्र देका – कुलपति, कॉटन विश्वविद्यालय • श्री अम्बिका दत्ता – कराटे प्रशिक्षक • श्री दिलीप अग्रवाल – जिला उपाध्यक्ष, NHRCCB • श्री देबाशीष दत्ता – जिला संयुक्त सचिव, NHRCCB • डॉ. जूरी गोस्वामी – सक्रिय सदस्य, NHRCCB कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कॉटन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। विद्यार्थियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों को "गुड टच और बैड टच" की पहचान एवं उससे बचाव के उपायों की जानकारी दी। साथ ही नाटक के माध्यम से समाज में बढ़ती नशाखोरी एवं अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सशक्त संदेश देते हुए युवाओं के लिए **नशामुक्त एवं स्वस्थ समाज** के निर्माण का आह्वान किया गया। विद्यालय प्रबंधन, अभिभावकों एवं स्थानीय समुदाय के लोगों ने इस जागरूकता कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे बाल सुरक्षा एवं सामाजिक चेतना के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल बताया। NHRCCB भविष्य में भी बच्चों, महिलाओं एवं समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा तथा जन-जागरूकता के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा। श्रीमती बबीता शर्मा जिला सचिव, NHRCCB कामरूप महानगर गुवाहाटी, असम
नैशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) जिला करनाल की टीम ने बच्चों और किशोरों पर ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों की रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहिंदर धानियां और श्री जितेन्द्र बंसल, अध्यक्ष कमिशनरेट, करनाल के नेतृत्व में टीम ने माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम जिला उपायुक्त महोदय, करनाल के मार्फत एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें सशक्त कानून और प्रभावी नीति निर्माण की मांग की गई है। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रमेश कुमार ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बच्चों और किशोरों को बचाने के लिए सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इस दौरान करनाल टीम के सदस्य श्री सुरेश कुमार गिल, श्री राजिंदर कुमार, श्री विजय पाल सिंह और संयुक्त सचिव दीपक सिरोही मौजूद रहे।
प्रेस विज्ञप्ति दिनांक: 29 अप्रैल 2026 डॉ. रणधीर कुमार ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र ऑनलाइन गेमिंग एवं सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर सख्त कानून की मांग तेज रांची / नई दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स—विशेषकर ऑनलाइन गेमिंग एवं सोशल मीडिया—के दुष्प्रभावों को लेकर नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने इस गंभीर विषय पर माननीय राष्ट्रपति महोदया को एक विस्तृत एवं महत्वपूर्ण पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप एवं कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। डॉ. रणधीर कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि “डिजिटल युग में तकनीक का सकारात्मक उपयोग जहां विकास का माध्यम है, वहीं इसका अनियंत्रित और दुरुपयोग समाज, विशेषकर बच्चों और किशोरों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। आज ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जिस प्रकार हिंसात्मक, अश्लील, भ्रामक एवं आयु-अनुपयुक्त सामग्री का प्रसार हो रहा है, वह एक उभरता हुआ राष्ट्रीय संकट है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इंटरनेट और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच के कारण देश के छोटे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक बच्चे और किशोर बिना किसी प्रभावी निगरानी के इन प्लेटफॉर्म्स के संपर्क में आ रहे हैं, जिससे उनके मानसिक, सामाजिक एवं नैतिक विकास पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बढ़ता खतरा: बच्चों पर गंभीर दुष्प्रभाव पत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि ऑनलाइन कंटेंट के अनियंत्रित प्रभाव के कारण बच्चों एवं किशोरों में निम्नलिखित समस्याएं तेजी से उभर रही हैं— मानसिक तनाव, अवसाद एवं चिंता में लगातार वृद्धि आक्रामक एवं असामाजिक व्यवहार का विकास पढ़ाई से दूरी एवं एकाग्रता में गिरावट डिजिटल लत (Addiction) की गंभीर समस्या साइबर अपराधों में संलिप्तता आत्मघाती प्रवृत्तियों में चिंताजनक वृद्धि डॉ. रणधीर कुमार ने इसे “देश के भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी” बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसके सामाजिक और राष्ट्रीय परिणाम अत्यंत घातक हो सकते हैं। वर्तमान व्यवस्था पर सवाल अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान कानूनी एवं नीतिगत व्यवस्थाएं इस चुनौती का प्रभावी समाधान देने में असफल साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि— डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉनिटरिंग कमजोर है आयु सत्यापन (Age Verification) की व्यवस्था प्रभावी नहीं है कंपनियों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय नहीं है दंडात्मक प्रावधान पर्याप्त कठोर नहीं हैं राष्ट्रपति से की गई प्रमुख मांगें नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) ने अपने पत्र के माध्यम से निम्नलिखित ठोस एवं तत्काल कदम उठाने की मांग की है— बच्चों के लिए हानिकारक ऑनलाइन गेमिंग एवं सोशल मीडिया कंटेंट पर कठोर नियामक नियंत्रण लागू किया जाए। आयु-आधारित कंटेंट वर्गीकरण (Age Rating System) एवं अभिभावकीय नियंत्रण प्रणाली को अनिवार्य बनाया जाए। अश्लील, हिंसक, जुआ-संबंधी एवं भ्रामक सामग्री के प्रसारण पर रोक हेतु सख्त दंडात्मक कानून बनाए जाएं। बच्चों की सुरक्षा हेतु एक व्यापक कानून “बाल डिजिटल सुरक्षा अधिनियम” लागू किया जाए। सभी सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारत में अनिवार्य लाइसेंसिंग एवं जवाबदेही प्रणाली सुनिश्चित की जाए। विद्यालयों, अभिभावकों एवं छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल जागरूकता अभियान चलाया जाए। साइबर विशेषज्ञों, बाल अधिकार संगठनों एवं शिक्षा विशेषज्ञों की संयुक्त उच्चस्तरीय समिति गठित कर ठोस नीति एवं कार्ययोजना तैयार की जाए। सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील डॉ. रणधीर कुमार ने अपने पत्र के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया है कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को आवश्यक निर्देश प्रदान किए जाएं, ताकि शीघ्र प्रभावी कानून एवं नीतियां लागू की जा सकें। उन्होंने कहा कि “बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ एवं संतुलित विकास ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है, और इसे सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” राष्ट्रीय कार्यालय नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB)
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि सुश्री आलिया खान द्वारा कुछ कथित गैर-कानूनी गतिविधियों में संलिप्तता की सूचना प्राप्त हुई है। इस संदर्भ में स्पष्ट किया जाता है कि आलिया खान पूर्व में संस्था से जुड़ी सदस्य रही हैं, परंतु वर्तमान में उनका NHRCCB से कोई संबंध नहीं है। यह भी अवगत कराना आवश्यक है कि Ref. No: NHRCCB/0029/2025 दिनांक 13 नवम्बर 2025 के अनुसार मार्च 2025 से पूर्व जुड़े सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए RE-KYC अनिवार्य किया गया था, किन्तु संबंधित व्यक्ति द्वारा यह प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई NHRCCB एक जिम्मेदार सामाजिक एवं मानवाधिकार संगठन है, जो किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधि या अपराध का समर्थन नहीं करता। संस्था कानून एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। – राष्ट्रीय कार्यालय राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB)
प्रेस विज्ञप्ति मानव गरिमा से सामाजिक न्याय तक: NHRCCB द्वारा “Universal Declaration of Human Rights” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न नई दिल्ली/भारत। राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2026 को “Universal Declaration of Human Rights” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन वेबिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और उत्तरदायित्व का एक जीवंत मंच बनकर उभरा। यह आयोजन उस मूल प्रश्न को पुनः सामने लाता है कि—क्या मानवाधिकार केवल कानून की धाराओं में सीमित हैं, या वे समाज की आत्मा और व्यवहार में भी प्रतिबिंबित होने चाहिए? वेबिनार के मुख्य वक्ता , माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानवाधिकारों की अवधारणा किसी एक राष्ट्र या समय की देन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की सतत चेतना का परिणाम है। उन्होंने इस बात पर गहन प्रकाश डाला कि यदि अधिकारों की चर्चा कर्तव्यों से अलग हो जाए, तो संतुलन भंग हो जाता है और वहीं से अन्याय की शुरुआत होती है। उनके शब्दों में—“मानवाधिकार केवल संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि आत्मानुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी दर्पण हैं।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपराध नियंत्रण और मानवाधिकार एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक तत्व हैं, जिनके बीच संतुलन ही एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की नींव रखता है। पीपीटी के माध्यम से मानव अधिकार के सार्वभौमिक घोषणापत्र को बेहद ही सरलतापूर्वक समझाया एवं इसके 30 अनुच्छेद पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी । वेबिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहिंदर पाल धानिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज में अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकता और नैतिक आचरण से सुनिश्चित होती है। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में संवेदनशीलता और समानता को स्थान देता है, तभी मानवाधिकारों की वास्तविक भावना जीवंत होती है। वेबिनार का संचालन राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर द्वारा अत्यंत संतुलित एवं प्रभावी ढंग से किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागरूक नागरिक बड़ी संख्या में जुड़े। चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आज के डिजिटल और बदलते सामाजिक परिवेश में मानवाधिकारों की परिभाषा और भी व्यापक हो गई है—अब यह केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि गरिमा, अभिव्यक्ति, निजता और समान अवसरों से भी गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। प्रश्नोत्तर सत्र में व्यावहारिक प्रश्नों ने इस विमर्श को और अधिक यथार्थपरक बना दिया। इसमें यह बात उभरकर सामने आई कि मानवाधिकारों का वास्तविक परीक्षण न्यायालयों में नहीं, बल्कि समाज के दैनिक व्यवहार—परिवार, कार्यस्थल और सार्वजनिक जीवन—में होता है। वेबिनार के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि मानवाधिकारों की रक्षा केवल कानूनों के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जागरूकता, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है। अंत में सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ तथा आगामी अंबेडकर जयंती के अवसर पर संविधान एवं मानवाधिकारों के प्रचार-प्रसार हेतु कार्यक्रम आयोजित करें। यह वेबिनार न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि मानवाधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। राष्ट्रीय कार्यालय राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) 🌐 www.nhrccb.org
नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन–2026 भव्य एवं गरिमामय रूप से संपन्न राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार के मार्गदर्शन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने मानवाधिकारों पर किया गहन मंथन, अधिवेशन में शामिल देश-विदेश के अतिथियों ने मानवाधिकार के कार्यों की प्रशंसा की , सुझाव भी दिए । रूस दूतावास की प्रथम सचिव ने कहा मानवाधिकारों को वैश्विक शांति और आपसी सहयोग का एक आधारशिला बताया राष्ट्रीय अध्यक्ष एन एच आर सी सी बी डॉ रणधीर कुमार के नेतृत्व दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 08 फरवरी 2026 को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन–2026 का भव्य आयोजन किया गया ।राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) के लिए एक ऐतिहासिक, विचारोत्तेजक और गरिमामय आयोजन के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह अधिवेशन माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें देश के लगभग सभी राज्यों से आए पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों, कानून विशेषज्ञों एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने व्यापक सहभागिता की। अधिवेशन का शुभारंभ उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसमें रूस दूतावास की प्रथम सचिव माननीया क्रिस्टीना अनानीना ने बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में मानवाधिकारों को वैश्विक शांति और आपसी सहयोग की आधारशिला बताया। इसके पश्चात अधिवेशन के स्मारिका (Souvenir) का विमोचन किया गया। उद्घाटन सत्र में केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), भारत सरकार से जुड़े माननीय पंकज कुमार, अधीक्षक (Customs & GST), पूर्व राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री माननीय दुष्यंत गौतम, तथा एनएचआरसीसीबी के राष्ट्रीय संरक्षक माननीय जय प्रकाश निषाद (पूर्व राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री) ने अपने विचार रखते हुए मानवाधिकारों को लोकतंत्र की आत्मा बताया। माननीय जय प्रकाश निषाद ने अपने संबोधन में संगठन की भूमिका और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रणधीर कुमार ने अधिवेशन में उपस्थित समस्त अतिथियों/ प्रतिनिधियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया । अधिवेशन के दौरान दो प्रमुख पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। पहली पैनल चर्चा का विषय “Crime Control vs Human Rights” रहा, जिसमें डिप्टी कमांडेंट, गृह मंत्रालय ,भारत सरकार डॉ. सुरेश प्रसाद वर्मा, दिल्ली पुलिस के सहायक आयुक्त दिनेश कुमार, एमिटी विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एकता गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह, भारत सरकार के पैनल काउंसिल एवं एनएचआरसीसीबी के विधिक सलाहकार विकास तिवारी, साइबर विशेषज्ञ अंशुल सक्सेना तथा राजनीतिक विश्लेषक परमजीत सिंह ने कानून, सुरक्षा और मानवाधिकारों के संतुलन पर सारगर्भित विचार रखे। इस सत्र का स्वागत भाषण राष्ट्रीय महासचिव श्री गिरीश चंद्रा ने दिए , समस्त अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया , समापन छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष श्री जतिंदर पाल सिंह द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। दूसरी पैनल चर्चा का विषय “Human Rights in the Digital Age” रहा। एनएचआरसीसीबी के राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रवीण रॉय ने स्वागत भाषण दिया। इस सत्र में भारत सरकार के राजपत्रित पुलिस अधिकारी एवं फिल्म निर्माता सत्यम मिश्रा, जीएसटी विभाग उत्तर प्रदेश के सहायक आयुक्त श्याम सुंदर पाठक, राजनीति की पाठशाला के संस्थापक अजय पांडे तथा मॉडर्न इंटरनेशनल स्कूल, दिल्ली की निदेशक डॉ. प्रिया माथुर ने डिजिटल युग में मानवाधिकारों की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार साझा किए। अधिवेशन के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि स्वतंत्र निदेशक इंजीनियर इंडिया लिमिटेड एवं इंटरनेशनल फेम श्रीमती करुणा गोपाल , बतौर विशिष्ट अतिथि नोबेल मेडिकल कॉलेज के निदेशक श्री निरंजन कुमार , जोनल रेलवे मेंबर , रेलवे बोर्ड,भारत सरकार के सदस्य श्री सौम्या रंजन प्रधान उपस्थित रहे , इस सत्र का वोट ऑफ थैंक्स श्री पंकज रंजित , राष्ट्रीय मीडिया पदाधिकारी उपस्थित रहे । समापन सत्र में संस्था की वार्षिक कैलेंडर का विमोचन किया गया , जिसमें संस्था के जारी विभिन्न गतिविधियां को लेकर जागरूक किया गया है । मुख्य अतिथि करुणा गोपाल ने संबोधित करते हुए कहा कि मानवाधिकार हर व्यक्ति की जरुरत है , सामूहिक पहल करते है हमे इसके संरक्षण में कार्य करनी चाहिए , बहुत खुशी है कि यह संगठन मानवाधिकार संरक्षण में भारत के एक अग्रणी संस्था के रूप में पहचान बना चुकी है अधिवेशन के दौरान अंतर्राष्ट्रीय/ राष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार–2026 समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय/ देश के विभिन्न राज्यों से आए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके पश्चात सभी पैनलिस्ट एवं विशिष्ट अतिथियों का औपचारिक अभिनंदन किया गया। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में संगठन के कई पदाधिकारियों का विशेष योगदान रहा। राष्ट्रीय सचिव श्री गिरिश चंद्रा, प्रवीण राय , दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री अभिरंजन कुमार, प्रदेश महासचिव श्री शेर सिंह , कानूनी सलाहकार विकास तिवारी, राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर प्रभात मिश्रा, राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार, अमृता सिंह , श्री सुरेश पुरोहित, श्री देवी प्रसाद साहू, छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष श्री जतिंदर पाल सिंह तथा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहिंदर पाल धानिया , प्रदेश उपाध्यक्ष झारखंड श्री सिकंदर वर्मा ने समन्वय, अनुशासन और संगठनात्मक क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। अधिवेशन के समापन अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रणधीर कुमार ने कहा कि प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह अधिवेशन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशभर में मानवाधिकार चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक साझा संकल्प है।यह अधिवेशन इस बात का प्रमाण है कि जब देश के विभिन्न प्रदेशों के लोग एक मंच पर आकर संवाद करते हैं, तो मानवाधिकार आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा मिलती है। उन्होंने सभी प्रदेशों की सहभागिता, अनुशासन और समर्पण की प्रशंसा की। राष्ट्रीय को ऑर्डिनेटर श्री प्रभात मिश्रा ने समस्त पदाधिकारियों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें मानवाधिकार के लिए कार्य करने को प्रोत्साहित किया। अधिवेशन का समापन संवैधानिक मूल्यों, मानव गरिमा और सामाजिक न्याय के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के संकल्प के साथ हुआ।
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